लद्दाख की गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की कायराना हरकत के बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ आक्रोश है. चीनी सेना की चालबाजी का जवाब देने के लिए एलएसी पर भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान एक-एक हरकत पर नजरें जमाए हुए हैं. मिराज सुखोई, अपाचे हेलीकॉप्टर हो या फिर चिनूक सबका निशाना अचूक है और भारतीय वायुसेना की पूरी शक्ति इस समय हाई अलर्ट पर है
अगर विपरीत परिस्थिति बनती है तो भारतीय वायुसेना चीन को किसी भी हालत में चौंका सकती है क्योंकि भारतीय वायुसेना के पास ऊंचाई पर उड़ान भरने का ज़बरदस्त अनुभव है.
भारत ने लद्दाख में लड़ाकू विमान मिराज 2000 तैनात कर दिया. ये वही फाइटर प्लेन है, जिसका इस्तेमाल बालाकोट एयरस्ट्राइक में हुआ था . सुखोई-30 भी अलर्ट पर है. भारत के लड़ाकू हेलिकॉप्टर लगातार सीमा की निगरानी कर रहे हैं. अपाचे हेलीकॉप्टर की नज़र भी एलएसी पर हो रही हरकतों पर है. चिनूक से तमाम सैनिक और हथियार फॉरवर्ड फ्रंट पर भेजे जा रहे हैं. जरूरी सामानों के साथ Mi-17V5 हेलिकॉप्टर भी लगातार उड़ान भर रहा है. चीन के पास 104 न्यूक्लियर मिसाइल हैं वहीं भारत के पास अग्नि 3 लॉन्चर सिस्टम है जो पूरे चीन में कहीं भी हमला कर सकती है.
चीन के पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी हैं DF-21 मिसाइल की रेंज 2150 किलोमीटर है
भारत के पास परमाणु क्षमता वाले 51 विमान हैं जो ग्रैविटी बम से लैस हैं और भारत अपने अग्नि 2 लॉन्चर से भी चीन के कई इलाकों को टारगेट कर सकता है.
भारत और चीन की हवाई शक्ति की बात करें तो चीन एक बार में भारतीय एयर डिफेंस का मुकाबला नहीं कर सकता. चीन के पास चौंकाने वाली मारक शक्ति नहीं है और भारत के पास ज़बरदस्त ऊंचाई पर लड़ाकू विमान और अटैक हेलिकॉप्टर्स को उड़ाने का बेजोड़ अनुभव है.
आज भारत की सेनाएं, अलग-अलग सेक्टर्स में, एक साथ मूव करने में भी सक्षम है.