राजधानी के माल ब्लाक का लतीफपुर गांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर रहा है। लतीफपुर को यूपी की पहली डिजिटल पंचायत होने का दर्जा मिला है। इसकी अपनी वेबसाइट और एप है। पूरा पंचायत भवन वातानुकूलित और कंप्यूटराइज्ड है। एक वाट्सएप ग्रुप बना है, जिससे ग्रामीण सीधे प्रधान और अधिकारियों से संपर्क में रहते हैं। अपनी समस्याएं बताते हैं। अब पंचायती राज विभाग पूरे प्रदेश में लतीफपुर पंचायत का मॉडल लागू करनेे की योजना बना रहा है।
राजधानी से करीब तीस किलोमीटर दूर मलिहाबाद तहसील के अंतर्गत माल ब्लाक में लतीफपुर ग्राम पंचायत है। एक अति पिछड़े गांव से यूपी के पहले डिजिटल गांव बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है। ग्राम पंचायत अगर आज मॉडल है तो इसके पीछे इंजीनियर से ग्राम प्रधान की कुर्सी पर बैठने वाली युवा श्वेता सिंह की कोशिशें हैं। श्वेता सिंह के सामने तमाम विकल्प थे मगर उन्होंने गांव में कुछ करने की ठानी। ग्राम प्रधान चुने के बाद श्वेता ने गांव के विकास के लिए तकनीक का सहारा लिया। पूरी ग्राम पंचायत को कंप्यूटराइज्ड कराया। सब कुछ ऑनलाइन कर दिया। ग्राम पंचायत को क्या मिल रहा है, क्या खर्च हो रहा है, सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध है।