आज के दौर में महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी है। इसकी नजीर रायवाला की मधु ने ई रिक्शा चलाकर पेश की है। इससे उनका आत्मनिर्भर बनने का सपना साकार हुआ है। अन्य महिलाओं के लिए भी वह प्रेरणा का स्त्रोत बनी हैं। ई रिक्शा चलाने से जो आमदनी होती है उसका एक हिस्सा वह निराश्रित गोवंश की सेवा में लगाती हैं।मूल रूप से रुद्रप्रयाग की रहने वाली मधु इस समय आने परिवार के साथ रायवाला के प्रतीतनगर में रहती हैं। मधु ने बीती वसंत पंचमी के दिन ई-रिक्शा खरीदा था। वह रायवाला से एम्स ऋषिकेश के बीच ई-रिक्शा चलाती हैं। इसमें एक अन्य महिला भी उनकी सहयोगी है। दोनों ने ये ई-रिक्शा मिलकर खरीदा है।मधु के अनुसार हिम्मत करने से कुछ भी असंभव नहीं है। परिवार में सब ठीक-ठाक होने के बाद भी मधु ने ई-रिक्शा चलाने का निर्णय सिर्फ इसलिए लिया, क्योंकि वह आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं। वह कहती है कि सरकार तमाम योजनाओं के जरिए आमजन को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही है। वह सरकार के दिखाए सपनों के सब्जबाग से बाहर निकल कर खुद हिम्मत करके अपनी रोजी-रोटी का इंतजाम कर सकती हैं। बताया कि वह क्षेत्र की चार अन्य महिलाओं के साथ मिलकर एक संस्था भी चलाती हैं। जिसमें निराश्रित गोवंश की सेवा की जाती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके पास छह गाय हैं, जो जख्मी और अन्य तरह की बीमारी से ग्रसित हैं। ई-रिक्शा को चलाकर जो भी आमदनी होगी उसका वह इन निराश्रित गायों की सेवा के लिए खर्च करेंगी।
अन्य महिलाओं के लिए भी वह प्रेरणा का स्त्रोत बनी-रायवाला की मधु
