गोपेश्वर, चमोली और रुद्रप्रयाग जिले कई दुर्गम गांव आज भी मोबाइल सेवा से महरूम हैं। इन गांवों की संचार व्यवस्था आज भी डाक विभाग के भरोसे हैं। लेकिन लंबे समय से विभाग डाकियों की कमी से जूझ रहा है। विभाग में डाकिया के 127 पद रिक्त पड़े हैं। स्थिति यह है कि एक डाकिया तीन-तीन गांवों में डाक और मनीऑर्डर के लेन-देन का जिम्मा संभाल रहा है। ऐसे में यहां समय से डाक भी नहीं बंट पा रही है।
चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में 392 डाकघर हैं, जिनमें से 127 डाकघरों में ग्रामीण डाक सेवकों के पद खाली हैं। केंद्र सरकार के अधीन होने के कारण डाक विभाग में आज भी नियुक्तियां अखिल भारतीय स्तर पर होती हैं, जिससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में डाकिया की नियुक्ति नहीं हो पाती है। चमोली जिले के कई डाकघरों में तेलंगाना, बिहार, यूपी, हरियाणा के युवा डाकिया के पद पर नियुक्त हैं, लेकिन दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण वे ज्वाइनिंग नहीं दे पाते हैं, जिससे डाकिया के पद रिक्त पड़े रहते हैं। स्थिति यह है कि जिले के गोविंदघाट और सलूड़ डुंग्रा ग्रामीण पोस्ट ऑफिस में तेलंगाना का व्यक्ति डाकिया का जिम्मा संभाले हुए है। डाक अधीक्षक एचसी उपाध्याय ने बताया कि 127 डाकघरों में डाकिया के पद रिक्त चल रहे हैं। बजट न होने के कारण संविदा पर भी डाकिए की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं। सीमित कर्मचारियों से ही डाक लेने का काम लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय स्तर पर डाकिया की नियुक्ति की जाती है, जिससे सीमांत क्षेत्रों में डाकिया के पद खाली रह जाते हैं। अब डाकिए के पदों पर भर्ती प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी की ओर से एक ही डिवीजन के लिए आवेदन करने का प्राविधान बना लिया गया है, जिसके बाद अब जनपद को डाकिया मिल जाएंगे।