सीएम ने पुलिसकर्मियों को प्रदान किए पदक
-स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को किया सम्मानित
-फोटो प्रदर्शनी का किया अवलोकन
देहरादून, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर परेड ग्राउण्ड देहरादून में राज्य के मुख्य कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट कार्यों के लिए मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया। पुलिस उप महानिरीक्षक सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस., उपनिरीक्षक रेखा दानू, कृपाल सिंह एवं मुख्य आरक्षी वेद प्रकाश भट्ट को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया गया। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के क्रम में यूकेएसएसएससी परीक्षा धांधली की जांच कर रही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के नेतृत्व में एस.टी.एफ. की टीम को भी मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस.टी.एफ. अजय सिंह, उप निरीक्षक दिलवर सिंह, नरोत्तम बिष्ट, उमेश कुमार एवं विपिन बहुगुणा को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया एवं फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
मुख्यमंत्री ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज जो हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं वह स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद जवानों के त्याग और बलिदान का प्रतिफल है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के सभी अमर शहीदों और आंदोलनकारियों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं। महान स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद वीर जवानों को समर्पित अमृत महोत्सव, नए भारत, आत्मनिर्भर भारत का भी संकल्प है। देश के घर-घर में फहराता तिरंगा दुनिया को एक भारत श्रेष्ठ भारत का संदेश दे रहा है। किसान का सम्मान हो, गरीब का कल्याण हो, युवा को अवसर हो, महिलाओं का उत्थान हो, तकनीक में नवाचार हो, विश्व पटल पर भारत की मजबूत पहचान हो, इतिहास की समस्याओं का स्थायी समाधान हो, ये सब प्रधानमंत्री जी की दृढ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। कोविड महामारी का जिस तरह से हमने सामना किया, उसकी पूरे विश्व में सराहना हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार, उत्तराखण्ड के चहुंमुखी विकास के लिए समर्पित भाव से जुटी है। लोगों को योजनाओं का लाभ मिले और उनकी समस्याओं का समाधान हो, इसके लिए सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि पर खास तौर पर फोकस किया गया है। अपणि सरकार पोर्टल, ई-कैबिनेट, ई-ऑफिस, सीएम हेल्पलाइन, सेवा का अधिकार और ट्रांसफर एक्ट की पारदर्शी व्यवस्था के चलते कार्यसंस्कृति में गुणात्मक सुधार हुआ है। अब प्रदेश का कोई भी व्यक्ति 1064 पर शिकायत कर भ्रष्टाचार को समाप्त करने में योगदान कर सकता है। हमने अपने वादे के अनुसार समान नागरिक संहिता के लिये समिति का गठन कर दिया है।समिति की तीन बैठकें भी हो चुकी हैं। हम गरीब परिवारों को तीन सिलेण्डर मुफ्त उपलब्ध करवाने जा रहे हैं। इसके लिये बजट में प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम सर्किट में आने वाले सभी मंदिरों और गुरुद्वारों में भौतिक ढांचे और परिवहन सुविधाओं के विस्तार की हमारी योजना है। हम कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन पर भी काम कर रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे नेटवर्क निर्माण के लिये पर्वत माला परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। सर्फेस पार्किंग के साथ ही मल्टीस्टोरी पार्किंग, केविटी पार्किंग व टनल पार्किंग भी विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि ही नहीं, वीरभूमि भी है। देहरादून में भव्य सैन्य धाम की स्थापना की जा रही है। हमारी सरकार, शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित कर रही है। उत्तराखण्ड राज्य के वीरता पदक से सम्मानित सैनिकों को देय एकमुश्त अनुदान में वृद्धि की गई है। स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी विधवाओं की पेंशन को बढ़ाने के साथ ही उत्तराखण्ड से द्वितीय विश्व युद्ध की वीरांगना एवं वेटरन की पेंशन में भी वृद्धि की गई है। हमने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में भी वृद्धि की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को देश से बाहर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने के लिये राज्य में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ के गठन की स्वीकृति दी है।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिये राज्य में 4457 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केन्द्रों में बाल वाटिकायें प्रारम्भ हो चुकी है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय स्टूडियो तथा राज्य के समस्त 13 जनपदों के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना की जा चुकी है। उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के उद्देश्य सेस्टार्ट-अप पॉलिसी लागू की गयी है।