एक दिन के लिए खुले कपाट, महिलाओं ने भगवान बंशीनारायण को बांधे रक्षासूत्र
जोशीमठ, । उर्गम घाटी में स्थित बंशीनारायण मंदिर के कपाट श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर एक दिन के लिए खोले गए। इस दौरान विशेष पूजा की गई और महिलाओं ने भगवान बंशीनारायण को रक्षासूत्र बांधे। डुमक और कलगोठ गांव के ग्रामीण घरों में तैयार किए गए मक्खन, घी और दूध लेकर आए जिससे भगवान का भोग तैयार किया गया। विभिन्न प्रजाति के फूलों से भगवान बंशीनारायण का श्रृंगार किया गया।
पुजारी मनोज सिंह रावत ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन भगवान बंशीनारायण के कपाट खुलते हैं और कुछ समय बाद बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान बंशीनारायण की विशेष पूजा कर उन्हें भोग लगाया जिसमें आसपास के गांव के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंचे। बंशीनारायण को मंदिर की फुलवाड़ी में उगे फूलों से सजाया गया। यहां उगे फूल रक्षाबंधन के दिन ही तोड़ा जाता है। इस दौरान विक्रम सिंह, लक्ष्मण सिंह रावत आदि लोग उपस्थित रहे।
मंदिर को लेकर मान्यता है कि राजा बलि के आग्रह पर भगवान नारायण पाताल लोक में द्वारपाल बन गए। माता लक्ष्मी उन्हें तलाशते हुए देवर्षि नारद के पास पहुंचीं तो नारद ने उन्हें भगवान नारायण के पाताल लोक में मौजूद होने की बात बताई। माता लक्ष्मी देवर्षि नारद के साथ पाताल लोक गईं और राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भगवान को मुक्त करा दिया। तब से बंशीनारायण मंदिर में रक्षाबंधन पर्व पर उन्हें रक्षासूत्र बांधने और उनकी विशेष पूजा का विधान है।