कैस्ट्रॉल इंडिया ने मेकैनिक्स के लिये अनूठी ‘ईवी रेडीनेस ट्रेनिंग शुरू की
देहरादून, ऑटोमोटिव आफ्टरमार्केट में मेकैनिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज में मेकैनिक्स के पर्याप्त ढंग से प्रशिक्षित न होने से काफी दिक्कतें आती हैं। भारत की प्रमुख लुब्रिकेंट कंपनी कैस्ट्रॉल ने प्रासंगिक व्यावसायिक और सामाजिक पहलों से मेकैनिक समुदाय को लगातार सहयोग दिया है। मेकैनिक्स के कौशल को बढ़ाने के लिए और प्रदूषण-रहित तथा ज्यादा स्थायित्वपूर्ण यातायात को अपनाने में योगदान के लिये, कैस्ट्रॉल इंडिया ने मेकैनिक्स के लिये एक अनूठा ट्रेनिंग प्रोग्राम ईवी रेडीनेस पेश किया।
ईवी रेडीनेस ट्रेनिंग प्रोग्राम नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें 100 से ज्यादा टॉप-टीयर कार और बाइक मेकैनिक्स शामिल हुए। इस ट्रेनिंग को ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल (एएसडीसी) ऑफ इंडिया का सहयोग और समर्थन प्राप्त था। इसमें भाग लेने वाले मेकैनिक्स को म्ट के बेहतर परफॉर्मेंस के लिये एडवांस्ड ईवी फ्लुइड्स की कैस्ट्राल चालू रेंज के प्रीव्यू का मौका मिला, जिसे 2021 में वैश्विक आधार पर लॉन्च किया गया था और जल्दी ही इसे भारत में लॉन्च किया जाएगा। इस ट्रेनिंग में आठ घंटे का एक मॉड्यूल था, जिसमें कार और बाइक के मेकैनिक्स ने इलेक्ट्रिक वाहन के बारे में बुनियादी बातें सीखीं और ईवी की सर्विस और मेंटेनेंस के लिये डायग्नोस्टिक स्किल्स हासिल कीं।
इस पहल के बारे में कैस्ट्रॉल इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप सांगवान ने कहा, “हमने व्यवसाय और सामाजिक लिहाज से विभिन्न पहलों द्वारा हमेशा मेकैनिक समुदाय को सहयोग दिया है, चाहे कैस्ट्रॉल सुपर मेकैनिक कॉन्टेस्ट हो या हमारा सीएसआर प्रोग्रामरू कैस्ट्रॉल एकलव्य। स्वतंत्र ऑटो मेकैनिक्स के लिये हमारे ट्रेनिंग प्रोग्राम्स खास तरीके से डिजाइन किये गये हैं, ताकि नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज पर उन्हें जानकारी दी जा सके और उन्हें बदलते ट्रेंड्स पर अपडेट रखने में मदद मिले। हमारे ट्रेनिंग और प्रमाणन के कोर्सेस मेकैनिक्स को अपने ग्राहकों के लिये सर्विस के श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अनुभवों की आपूर्ति में सशक्त बनाते हैं। इससे उन्हें बढ़ने और अपने व्यवसाय के विस्तार तथा आजीविका में भी मदद मिलती है।” एएसडीसी के सीईओ अरिंदम लाहिरी ने कहा, “हमें खुशी है कि उद्योग की प्रमुख कंपनियां, जैसे कि कैस्ट्रॉल, स्किल ट्रेनिंग की अपनी पहलों के लिये एएसडीसी से जुड़ रही हैं। एएसडीसी में सभी मौजूदा पदों को इस तरह अपग्रेड किया गया है, कि उनमें ऑटोमोटिव उद्योग में हो रहे बदलाव स्पष्ट रूप से झलकते हैं। हमने म्ट से जुड़े नये कोर्सेस और पाठ्यक्रम लॉन्च करने के लिये उद्योग विशेषज्ञों की सहायता भी ली है।”